महिला को सरेआम निर्वस्त्र करना सजा या शोषण?

भारत एक ओर जहां डिजीटल युग में प्रवेश कर रहा हैं। वहीं, हमारा ग्रामीण समाज आज भी 17वीं शताब्दी की परंपराओं से उपर उठने को तैयार नहीं है। सरेआम एक महिला के शरीर से कपड़े उतारने वाले समाज को सभ्य समाज कहना गुनाह नहीं तो और क्या है‌? दरअसल, यह घटना बिहार के मुजफ्फरपुर जिला अन्तर्गत बरुराज थाना की है। समाज के कथित ठेकेदारो ने यहां एक गांव में 62 वर्षीया महिला को सरेआम निर्वस्त्र करके गांव में घुमाने की शर्मनाक घटना को अंजाम देकर पूरे समाज को कलंकित कर दिया है।

डायन के आरोप लगा कर दी सजा
महिला पर डायन होने का आरोप लगा पहले तो दबंगों ने उसकी बूरी तरीके से पिटाई कर दी और इससे भी मन नहीं भरा तो जबरन महिला के मुंह में गंदा भी पिला दिया। बीच-बचाव करने पर दबंगो ने पीड़िता के पुत्र की कनपटी पर पिस्टल सटाकर फायर किया। पर, मिस फायर होने से उसकी जान बच गई। दबंगों ने पीड़िता के पति के साथ भी मारपीट कर लूटपाट की और उनकी दुकान में ताला जड़ दिया है। पीड़िता के पति ने गुरुवार को थाने में एफआईआर करायी है। इसमें स्थानीय मुखिया सहित आधा दर्जन लोगो को आरोपित बनाया गया है।
ये है आरोप
थानो में दर्ज एफआईआर में पीड़िता के पति ने पुलिस को बताया है कि गांव के किशुनदेव महतो के सात वर्षीय पुत्र मुन्ना कुमार का स्वास्थ्य बराबर खराब रहता है। किशुनदेव व उसके परिजन पीड़िता पर जादू-टोना का आरोप लगाकर पहले भी प्रताड़ित कर चुके थे। बुधवार की दोपहर पीड़िता अपने पति के साथ अपनी जनरल स्टोर पर बैठी थी। इस दौरान लाठी-डंडे व हथियार से लैस सभी आरोपित आ धमके। आरोपितों ने पहले तो पीड़िता पर मुन्ना को ठीक करने का दबाव बनाया और महिला के द्वारा इंकार करने पर पीड़िता की पिटाई करने लगे।
ऐसे दिया घटना को अंजाम
आरोपितो ने पीड़िता की पिटाई करने के बाद उसका बाल पकड़कर घसीटते हुए गांव में ले गए और जबरन उसको मैला भी पिला दिया। इससे भी जब मन नहीं भरा तो किशुनदेव व विक्रम ने पीड़िता के शरीर से कपड़ा उतार कर उसे पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया और फिर सरेआम पूरे गांव में घुमाया। ताज्जुब की बात ये कि इस घटना का किसी ने विरोध नहीं किया और गांववाले मूक दर्शक बन कर तमाशा देखते रहें। महिला का पूरा परिवार दहशत में है और उसका कहना है कि आरोपित कभी भी उसके परिवार की हत्या करा सकते हैं।
आरोपितो ने किया घटना से इनकार
दूसरी ओर घटना के मुख्य आरोपित बने मुखिया हीरालाल खड़िया ने घटना से इनकार करते हुए बताया है कि पीड़िता के पति व किशुनदेव महतो के बीच कई वर्षों से जमीन विवाद चल रहा है। इसी वजह से पीड़िता कुछ लोगों के प्रभाव में आकर गलत आरोप लगा कर फंसा रही है। मामले में एफआईआर दर्ज करके पुलिस ने एक आरोपित को भी गिरफ्तार भी कर लिया है। फिलहाल, सच क्या है और झुठ क्या? यह तो पुलिस की तफ्तीश पूरी होने के बाद ही पता चल सकेगा।

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