आधार डेटा की सुरक्षा सवालो के घेरे में

दावा: वेबसाइट से डेटा चोरी करना संभव नहीं है

भारत में आधार डेटा की सुरक्षा को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ गई है। आधार डेटा की सुरक्षा को लेकर चिंता के बीच यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) का कहना है कि आधार वेबसाइट से डेटा चोरी करना संभव नहीं है। हालांकि, आधार की सुरक्षा पर बहस जारी है। हालांकि, सच्चाई यह भी है कि आज आधार भारत में किसी अन्य पहचानपत्र के मुकाबले अधिक विश्वसनीय बन चुकी है। दावा यह भी है कि अस्तित्व में आने के सात साल में आधार डेटाबेस में कभी सेंध नहीं लगी है। सभी आधार धारक का डेटा पूरी तरह सुरक्षित है। आधार डेटा सेंध की अधिकतर खबरों में गलत जानकारी दी गई। UIDAI का दावा है कि डेटा को सुरक्षित रखने के लिए अडवांस सिक्यॉरिटी टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जाता है और आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए इसे लगातार अपडेट भी किया जाता है।
जानें क्या है वर्चुअल आईडी
दरअसल, आधार नंबर को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने एक वर्चुअल आईडी जारी कर दी है। यह वर्चुअल आईडी 16 अंकों का विशिष्ट नंबर है। जिसे आधार धारक द्वारा बनाया व बदला जा सकता है। वर्चुअल आईडी को आधार धारक कई बार बदल सकते हैं। एक समय पर किसी भी आधार कार्ड के लिए केवल एक ही एक्टिव वर्चुअल आईडी हो सकती है।
वर्चुअल आईडी का इस्तेमाल
किसी भी ऑथेंटिकेशन के लिए धारकों को पहले अपना आधार नंबर देना होता था। लेकिन 1 जुलाई से उन्हें 16 अंकों का वर्चुअल आईडी देना होगा। इससे आधार धारक को किसी भी ट्रांजैक्शन या अन्य काम के लिए अपना आधार नंबर देने की आवश्यकता नहीं है। ऑथेंटिकेशन के लिए वर्चुअल आईडी देने के बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा जिसका इस्तेमाल आप किसी भी सर्विस या ट्रांजैक्शन को सत्यापित करने के लिए कर सकते हैं।

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