मीनापुर में बूढ़ी गंडक पर पुल के लिए ग्रामीण कर रहें हैं अनशन

संतोष जनक आश्वासन मिलने तक अनशन जारी रखने का ऐलान

बिहार के मुजफ्फरपुर जिला अन्तर्गत मीनापुर के चांदपरना घाट के समीप बूढ़ी गंडक नदी पर पुल बनाने की मांग को लेकर श्रमिक कल्याण संघ के अध्यक्ष राजनन्दन सहनी मीनापुर प्रखंड मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हुए है।

अनशन कर रहें है राजनंदन सहनी ने बताया कि जब तक प्रदेश सरकार पुल बनाने की घोषणा नहीं करती है, तब तक अनशन जारी रहेगा। अनशन के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई अधिकारी सुधि लेने नहीं पहुंचा। इससे अनशनकारियों में असंतोष है।
समर्थन में उतरे स्थानीय जन प्रतिनिधि
इस बीच राजनंदन सहनी के समर्थन में चांदपरना के मुखिया इंदल सहनी, सरपंच नरेश ठाकुर और पूर्व सरपंच शंकर सहनी के कूद पड़ने से प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती है। दूसरी ओर समाजिक कार्यकर्ता हरिचंद्र सहनी, जिया लाल सहनी, राजदेव सहनी, अनिरूद्ध सहनी, गिरजा सहनी, शेखर सहनी, जयनारायण कुमार, कंचन सहनी, सरबर इमाम, बंशलाल कुमार आदि समाजिक कार्यकर्ता अनशन के समर्थन में धरना पर बैठ गएं हैं। लोगो ने बताया कि प्रशासन की बेरूखी से लोगो का आक्रोश कभी भी भड़क सकता है।
ये है पूरा मामला
दरअसल, चांदपरना में बूढ़ी गंडक नदी पर पुल बनाने की मांग को लेकर श्रमिक कल्याण संघ के अध्यक्ष राजनंदन सहनी पिछले एक दशक से लगातार संघर्ष करते रहे हैं। वर्ष 2014 के जनवरी और दूसरी बार वर्ष 2016 के फरवरी में पुल बनाने को लेकर वे दो बार पहले भी अनशन भी कर चुके हैं। इस बीच चांदपरना में पुल बनाने के लिए राजनन्दन सहनी ने भारत के राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक व बिहार के राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखकर गुहार भी लगा चुके हैं।
विधानसभा में भी उठ चुका है पुल बनाने की मांग
गत वर्ष मीनापुर के विधायक मुन्ना यादव ने विधानसभा में चांदपरना में पुल बनाने की मांग उठाई थी। बतातें चलें कि इसके बाद पुल निगम विभाग के अधिकारी चांदपरना पहुंच कर स्थल की जांच की व प्रोजेक्ट बनाकर सरकार के पास भेज दिया। किंतु, प्रोजेक्ट के रिजेक्ट होने के बाद अब नए सिरे से दूबारा प्रोजेक्ट बना कर सरकार के पास भेजा गया है। पुल निगम विभाग ने चांदपरना में पुल का जो डीपीआर तैयार किया है, उसका अनुमानित लागत खर्च करीब 115 करोड़ रुपये आंका गया है। समझा जा रहा है कि अधिक राशि होने के कारणो से सरकार से फिलहाल इस प्रोजैक्ट को ठंडे वस्ते में डाल दिया है। इससे ग्रामीणो में असंतोष है।

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