हिन्दी से विश्व में हिन्दुस्तान की बनी पहचान: डॉ. रामविलास

संजय कुमार सिंह
मुजफ्फरपुर। विश्व का अनोखा देश है हिन्दुस्तान जहाँ की भाषा हिन्दी से विख्यात है। आज देश की सवा सौ करोड़ लोग अपनी मात्री भाषा हिन्दी को मानते है यह देश के लिए गौरव की बात है। ये बाते प्रगति सेवा संस्थान के तत्वावधान में गुरूवार को आयोजित राजकीय प्राथमिक विद्यालय मधौल ककड़ा में हिन्दी दिवस पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्य अतिथि सह महान साहित्यकार डॉ. रामविलास ने कही। उन्होंने कहा की हिन्दी हमारी अस्तित्व व अस्मिता का दर्पण है जिसे देश की जनता अपनी धरोहर समझती है।
मंच का संचालन शम्भू प्रसाद गुप्ता तथा आचार्य प्रमोद झा ने संयुक्त रूप से किया। मौके पर राजद सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव नवेन्दु नवीन ने हिन्दी के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिन्दी आज कार्पोरेट घरानों कि मजबूरी हो गई है जो हिन्दी भाषा का शतप्रतिशत इस्तेमाल कर रही है। हिन्दी की विचार गोष्ठी के उपरान्त कार्यक्रम की द्वितीय पाली में कविगोष्ठी की आयोजन की गई। जिसमें हास्य कवि वैकुण्ठ ठाकुर ने स और म में झगड़ा हुआ सुनाकर लोगों को हँसने पर मज़बूर कर दिया। साथ ही कहा की अंग्रेजी का एक शब्द ‘ सर ‘ के सामने आज अच्छे – अच्छे लोग गुलाम बने गय है । जैसे शिक्षक को सर , चिकित्सक को सर , दारोगा को सर , बैंक मे प्रबंधक को सर इतना ही नही अब हम नेता को भी सर कहते फिरते है। यह सर शब्द तो हिन्दी के लिए सिर दर्द हो गई है इससे मुक्ति कैसे हो? यह बात सुन उपस्थित लोग लोट पोट होने लगे।
नवेन्दु नवीन की कविता अगले जनम मुझे मनुष्य मत बनाना ने लोगों को भावविह्वल कर दिया। कमलेश शर्मा की वज्जिका कविता देख संस्कार के खेल तथा प्रमोद झा की वज्जिका गीत कीरनिया और ताड़ी वाली ने लोगों को खूब हंसाया। ई. नाज ओजैर की गज़ल माँ की महिमा ने भी लोगों को रोमांचित किया। शम्भू प्रसाद गुप्ता ने भी अपनी रचनाएँ सुनाई। अतिथियों का स्वागत प्रधानाध्यापिका मंजू कुमारी एवं शिक्षक कमलेश कुमार कनक ने की। मंजू कुमारी ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम से बच्चों में प्रेरणा व समाज को शिक्षा के क्षेत्र मे जागरूक करता है। विद्यालय परिवार सदा ऐसे आयोजन में सहयोग करती रहेगी । मौके पर आयुष कुमार, परमजीत कुमार, पंकज कुमार, बबलू कुमार, इत्यादि लोगों ने भी अपने विचार रखे।